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Saturday, 2 May 2026

रुकी हुई हवा के हस्ताक्षर

 रुकी हुई हवा के हस्ताक्षर


रुकी हुई हवा

जैसे किसी ने

समय की साँस रोक दी हो,

और क्षण

अपनी ही धड़कन सुनने लगे हों।


उसने कुछ लिखा नहीं,

फिर भी

स्लेट भरी हुई थी

एक घनी खामोशी से,

जिसमें अनकहे शब्द

ठहरे हुए थे।


पत्ते स्थिर थे,

पर उनमें एक प्रतीक्षा थी—

जैसे कोई वाक्य

पूरा होने से पहले

ठहर गया हो।


ये हस्ताक्षर

रेखाओं में नहीं दिखते,

ये उस विराम में हैं

जहाँ अर्थ

अपनी गहराई चुनता है।


मैंने पढ़ना चाहा,

तो लगा—

यह पढ़ने की नहीं,

सुनने की चीज़ है,

जहाँ शून्य भी

एक भाषा बोलता है।


रुकी हुई हवा के हस्ताक्षर

कहते हैं—

हर गति के बीच

एक आवश्यक ठहराव है।


और जो थम गया है,

वही

अपने भीतर

सबसे अधिक चल रहा होता है।


मुकेश ,,,,,,,,,,,

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