कुछ रास्ते
तुम्हें कहीं पहुँचाने के लिए नहीं होते,
बस
थोड़ी देर तुम्हारे साथ चलते हैं।
एक पुराना पुल था
नदी के ऊपर झुका हुआ
मैं देर तक वहाँ खड़ा रहा,
और पानी में गिरती हुई शाम को देखता रहा।
किसी ने मुझे आवाज़ नहीं दी,
फिर भी लगा
जैसे कोई बहुत देर से
मेरा इंतज़ार कर रहा हो।
हवा में
गीली मिट्टी, पत्तों
और बीते हुए मौसमों की बू थी।
मैंने धीरे से
तुम्हारा नाम लिया
नदी ने उसे बहा दिया,
आसमान ने कुछ नहीं कहा,
लेकिन दूर कहीं
एक परिंदा अचानक उड़ पड़ा।
शायद
हर मोहब्बत का अंजाम मिलना नहीं होता,
कुछ प्रेम
बस
दुनिया की ख़ामोशी में
एक हल्की-सी हरकत बनकर रह जाते हैं।
मुकेश ,,,,,,,,
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