“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
ख़ामोश मोबाइल
मेज़ पर रखा मोबाइल
पूरी रात
नहीं बजा।
सुबह
उसकी स्क्रीन पर
समय अब भी
चल रहा था।
मुकेश ,,,,,,,,,,,
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