“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
नींद के बाहर रखा जूता
दरवाज़े के पास
एक जूता
सीधा रखा था।
दूसरा
बिस्तर के नीचे
उलटा पड़ा था।
कमरे में
बहुत गहरी नींद थी।
मुकेश ,,,,,,,,
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