“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
टूटा हुआ स्विच
दीवार पर
एक पुराना स्विच था
जो अब
किसी चीज़ से जुड़ा नहीं था।
फिर भी
घर में आने वाले लोग
अनजाने में
उसे दबा देते थे।
मुकेश ,,,,,,,
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