सत्रहवाँ तमाशा - आधे-अधूरे प्रेम का तमाशा
कुछ लोग
कभी पूरी तरह प्रेम नहीं करते।
वे
बस
थोड़ा-सा साथ,
थोड़ा-सा स्नेह,
और बहुत-सी अनुपस्थिति छोड़ जाते हैं।
फिर वर्षों बाद भी
उनकी याद
पूरी नहीं जाती।
अधूरा प्रेम
अक्सर
पूर्ण प्रेम से लंबी उम्र पाता है।
मुकेश ,,,,,,,,,,
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