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Monday, 4 May 2026

मैं तन्हा हूँ मगर हालात से डरता नहीं हूँ,

 मैं तन्हा हूँ मगर हालात से डरता नहीं हूँ,

अँधेरों में भी अपने हौसले खोता नहीं हूँ।

मैं अपने उसूलों पे ही क़ायम रहा हरदम,
किसी के सामने यूँ बेवजह झुकता नहीं हूँ।

ये दुनिया लाख कोशिश कर ले मोड़ें मेरे रस्ते,
मैं अपने रास्तों से इस तरह हटता नहीं हूँ।

ख़रीदेंगे मुझे क्या ये जहाँ के लोग आख़िर,
मैं अपने ज़मीरों को कभी बेचता नहीं हूँ।

जो दिल में है वही लफ़्ज़ों में ढालूँ मैं हमेशा,
मैं अपने दर्द को दुनिया से छुपता नहीं हूँ।

कभी थक जाऊँ तो ठहर जाऊँ ये मुमकिन है,
मगर मैं हार कर रस्ते में रुकता नहीं हूँ।


'मुकेश' ये तन्हाई भी अब साथ निभाती है,
मैं अपने आप से इस मोड़ पर टूटता नहीं हूँ।


मुकेश' ,,,,,,,,,,,,,,

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