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Friday, 15 May 2026

प्लेटफ़ॉर्म : बारहवीं नज़्म — फ़ास्ट ट्रेनों का बिना रुके गुज़र जाना

 प्लेटफ़ॉर्म : बारहवीं नज़्म — फ़ास्ट ट्रेनों का बिना रुके गुज़र जाना

कुछ फ़ास्ट ट्रेनें

इस छोटे स्टेशन पर

कभी नहीं रुकती थीं।


वे बस

एक तेज़ गर्जना की तरह आतीं,

हवा का भारी झोंका छोड़तीं

और आँख झपकते ही

अँधेरे या धूप में

गुम हो जातीं।


प्लेटफ़ॉर्म पर खड़े लोग

बस कुछ पल

उन्हें देखते रह जाते।


बच्चे

हाथ हिलाते,

कुत्ते घबराकर पीछे हट जाते,

और चाय के कुल्हड़ों में

चाय हल्की-सी काँप उठती।


उन ट्रेनों की खिड़कियों में

चेहरे तो दिखते थे,

पर इतने तेज़

कि कोई कहानी पकड़ में नहीं आती थी।


मुझे हमेशा लगा

कुछ लोग भी

ऐसी ही फ़ास्ट ट्रेनों जैसे होते हैं।


वे हमारी ज़िंदगी से

गुज़र तो जाते हैं,

लेकिन ठहरते नहीं।


बस

एक शोर,

एक चमक,

एक बेचैनी छोड़ जाते हैं।


छोटे स्टेशन

शायद इसी दुख के साथ जीते हैं

कि दुनिया की सबसे तेज़ चीज़ें

उन्हें सिर्फ़ पार करती हैं,

अपना हिस्सा नहीं बनातीं।


फिर भी

प्लेटफ़ॉर्म हर बार

उतनी ही उम्मीद से

पटरियों की ओर देखता है।


जैसे उसे यक़ीन हो

कि कभी न कभी

कोई तेज़ ट्रेन

सिर्फ़ गुज़रने के लिए नहीं,

रुकने के लिए भी आएगी।


मुकेश ,,,,,,,,

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