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Wednesday, 20 May 2026

एक बंद गली —

 एक बंद गली — 

गली कभी बंद नहीं थी। वह धीरे-धीरे बंद हुई है — जैसे कोई दरवाज़ा नहीं, बल्कि समय खुद अपनी दिशा बदल ले।

यहाँ पहले लोग चलते थे, पर अब केवल उनकी आदतें चलती हैं। पत्थरों पर पैरों के निशान हैं, पर वे आगे की ओर नहीं जाते — वे वहीं रुककर थोड़े और गहरे हो जाते हैं।

गली के दोनों ओर दीवारें हैं, लेकिन वे दीवारों जैसी नहीं लगतीं। उनमें एक अजीब-सी झुकाव है — जैसे किसी ने चलते-चलते अचानक तय किया हो कि आगे जाना आवश्यक नहीं।

हवा आती है, पर पूरी नहीं आती। बीच में ही रुक जाती है, और लौटने से पहले एक हल्की-सी झिझक छोड़ जाती है।

एक मोड़ पर एक पुराना दरवाज़ा है। उसका रंग अब रंग नहीं लगता — वह समय की परत जैसा हो गया है। उस पर किसी ने बहुत पहले अपना नाम लिखा था, पर बारिशों ने उसे पढ़ने से मना कर दिया है। अब वह नाम केवल एक अनुमान है।

गली में रोशनी है, पर पूरी नहीं। अँधेरा भी है, पर पूरा नहीं। दोनों किसी अनकहे समझौते में बंधे हुए हैं — एक-दूसरे को समाप्त नहीं करते।

यहाँ चलना एक साधारण क्रिया नहीं रह जाती। हर कदम अपने पीछे लौटने की संभावना रखता है। जैसे गली आगे नहीं जाती, केवल याद करती है कि आगे जाना था।

कभी-कभी लगता है, यह गली बाहर की दुनिया में नहीं है। यह भीतर की किसी ऐसी जगह है जहाँ निर्णय धीरे-धीरे स्थान बदल लेते हैं।

और अंत में, यह भी स्पष्ट नहीं रहता कि गली बंद है या खुली।

सिर्फ़ इतना महसूस होता है — जो भी यहाँ प्रवेश करता है, वह थोड़ा और धीमा हो जाता है, और धीरे-धीरे समझने लगता है कि बाहर शायद कभी था ही नहीं।

मुकेश ,,,,

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