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Wednesday, 20 May 2026

काँच का कमरा —

 काँच का कमरा — 

कमरे में एक खिड़की थी, और उसके ठीक सामने, दूरी की तरह स्थिर, एक और खिड़की। दोनों के बीच काँच था, पर समय के साथ यह अंतर मिटता गया कि वहाँ काँच है या केवल देखने की आदत।

वह हर शाम उसी कुर्सी पर बैठती थी। कुर्सी साधारण थी, लेकिन उसमें एक अजीब-सी स्मृति बस गई थी — जैसे वह किसी लंबे, अधूरे वाक्य का अंतिम विराम हो। वह कभी स्पष्ट नहीं कहती थी कि वह किसका इंतज़ार कर रही है। शायद इसलिए कि अब इंतज़ार किसी व्यक्ति का नहीं रहा था, वह एक स्थिति बन चुका था।

कमरे की दीवारें कई बार बहुत धीमे पास आती प्रतीत होती थीं, फिर रुक जातीं। जैसे उन्हें भी अपने उद्देश्य पर संदेह हो गया हो। इस संदेह में कोई भय नहीं था, केवल एक थकी हुई सहमति थी।

उसके मोबाइल में कुछ नाम थे। वे नाम अब बातचीत नहीं थे, केवल अधूरे संकेत थे — जिन्हें वह कभी खोलती, कभी बिना पढ़े बंद कर देती। हर नाम जैसे किसी ऐसी चीज़ का दरवाज़ा था, जो खुलने से पहले ही बंद हो चुकी थी।

एक दिन एक पुरुष आया। वह किसी संबंध का नाम लेकर नहीं आया था। उसकी उपस्थिति केवल इतनी थी कि कमरे में मौन का स्वर बदल जाए। उसने कहा — यह कमरा बहुत बंद है।

वह कुछ नहीं बोली। उसने केवल खिड़की की ओर देखा। खिड़की के पार वही दूसरी खिड़की थी, लेकिन अब उसमें स्पष्टता नहीं बची थी — केवल एक हल्का-सा धुंधलापन, जो देखने और न देखने के बीच लटका था।

उसके बाद समय धीरे-धीरे अपना व्यवहार बदलने लगा। घड़ी अब समय नहीं बताती थी, केवल उसकी अनुपस्थिति का संकेत देती थी। दिन और रात के बीच का फर्क कम होने लगा, जैसे दोनों एक-दूसरे में गलने लगे हों।

दोनों लोग एक ही कमरे में रहते थे, लेकिन एक ही समय में नहीं।

वह उसकी बात सुनती थी, पर शब्द वहाँ तक पहुँचने से पहले ही अर्थ खो देते थे।

वह उसकी चुप्पी में किसी नाम को ढूँढता था, पर वहाँ केवल एक फैलता हुआ रिक्त स्थान था, जो धीरे-धीरे अपने होने का विश्वास बनता जा रहा था।

फिर एक दिन वह चला गया। न कोई दरवाज़ा खुला, न बंद हुआ। केवल एक संभावना थी, जो कमरे से बाहर चली गई।

कमरे में अब भी दो कुर्सियाँ हैं। पर अब वे एक-दूसरे की ओर नहीं झुकतीं। खिड़की के पार अब भी दूसरी खिड़की है, काँच भी है — लेकिन प्रतिबिंब नहीं बनते।

सिर्फ़ एक आदत बची है, जो हर शाम आती है, उस खाली कुर्सी पर बैठती है, और बिना किसी आवाज़ के कमरे में धीरे-धीरे फैल जाती है।

मुकेश ,,,,

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