“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
पुराना पासवर्ड
बहुत देर तक वह एक ही शब्द टाइप करता रहा।
स्क्रीन बार-बार उसे ग़लत बताती रही।
कमरे में सिर्फ़ की-बोर्ड की आवाज़ थी।
मुकेश ,,,,,,,,,,,
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