“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
फ़ास्ट ट्रेन गुज़री
और प्लेटफ़ॉर्म पर
कुछ देर तक
धूल खड़ी रही।”
मुकेश ,,,,,,,
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