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Thursday, 14 May 2026

पाँचवाँ तमाशा

पाँचवाँ तमाशा

प्रेम का तमाशा

अब प्रेम भी
धीरे-धीरे
एक सार्वजनिक प्रदर्शन में बदल गया है।

लोग प्रेम कम करते हैं,
उसकी घोषणा ज़्यादा करते हैं।

हर मुस्कुराहट के पीछे
एक कैमरा छिपा है,
हर आलिंगन के पीछे
एक पोस्ट का मसौदा।

दो लोग
समुद्र किनारे बैठे हैं
मगर लहरों को नहीं,
अपने-अपने फ़ोन के फ्रंट कैमरे को देख रहे हैं।

कैप्शन लिखा जा रहा है—
“Forever ❤️”

और उसी रात
दोनों अलग-अलग कमरों में
चुप्पी से लड़ रहे होते हैं।

प्रेम अब
धीरे-धीरे
अनुभव से ज़्यादा
प्रदर्शन बनता जा रहा है।

पहले लोग
प्रेमपत्र छुपाते थे,
अब चैट्स लीक करते हैं।

पहले किसी का नाम
दिल में रखा जाता था,
अब “स्टेटस” में रखा जाता है।

और अजीब बात यह है
कि जितना ज़्यादा प्रेम दिखता है,
कई बार
उतना ही कम बचा होता है।

मैंने एक लड़के को देखा
जो हर रोज़ अपनी प्रेमिका की तस्वीर डालता था,
मगर जब वह रो रही थी
तो उसके पास
समय नहीं था।

मैंने एक लड़की को देखा
जो दुनिया को बताती थी
“वह मेरी पूरी दुनिया है…”
मगर भीतर ही भीतर
वह खुद को
धीरे-धीरे खोती जा रही थी।

अब प्रेम में
इंतज़ार कम,
घबराहट ज़्यादा है।

“Last seen”
ने धैर्य मार दिया।
“Typing…”
ने बेचैनी बढ़ा दी।

और “Seen”
कई रिश्तों का
सबसे बड़ा श्मशान बन गया।

लोग अब
एक-दूसरे को पढ़ते नहीं,
बस
एक-दूसरे की ऑनलाइन उपस्थिति नापते हैं।

कभी-कभी लगता है
हम प्रेम में नहीं,
अपनी-अपनी असुरक्षाओं में गिरते हैं।

और फिर
उसे ही प्रेम का नाम दे देते हैं।

सच तो यह है
कि प्रेम हमेशा से
थोड़ा मौन था।

वह भीड़ में नहीं,
दो लोगों के बीच की
अनकही जगहों में रहता था।

मगर अब
हर चीज़ को साबित करना पड़ता है।

यहाँ तक कि प्रेम को भी।

और इस पूरी दुनिया में
जहाँ लोग
दिल टूटने से ज़्यादा
अनफॉलो होने से डरते हैं

मैं सोचता हूँ
प्रेम शायद
धीरे-धीरे
तमाशा बनता जा रहा है।

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