होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक

Friday, 15 May 2026

प्लेटफ़ॉर्म : सातवीं नज़्म — अनाउंसमेंट

 प्लेटफ़ॉर्म : सातवीं नज़्म — अनाउंसमेंट

“यात्रियों कृपया ध्यान दें…”

जैसे ही
लाउडस्पीकर पर
यह आवाज़ उभरती,
पूरा प्लेटफ़ॉर्म
एक साथ
अपने इंतज़ार से सिर उठा लेता था।

कुछ लोग
फ़ौरन टिकट टटोलते,
कुछ
सामान के हैंडल कसकर पकड़ लेते,
और कुछ चेहरों पर
अचानक
उम्मीद लौट आती।

लेकिन घोषणाएँ
हमेशा ट्रेनों की नहीं होतीं।

कभी वे
लेट होने की खबर लातीं,
कभी प्लेटफ़ॉर्म बदलने की,
और कभी
किसी छूट चुके सफ़र की।

आवाज़
एक औरत की थी—
बिलकुल सपाट,
बिना किसी भावना के।

फिर भी
न जाने क्यों
उसमें एक अजीब उदासी सुनाई देती थी,
जैसे वह रोज़
हज़ारों लोगों की बेचैनियाँ पढ़ती हो।

“गाड़ी संख्या…”

और उसके बाद
लोगों की धड़कनें
अपने-अपने शहरों की ओर दौड़ने लगतीं।

मैंने देखा है—
कुछ लोग
पूरी ज़िंदगी
एक अनाउंसमेंट की तरह जीते हैं।

वे आते हैं,
थोड़ी देर
दूसरों के जीवन में गूँजते हैं,
फिर भीड़ और शोर में
धीरे-धीरे खो जाते हैं।

और कुछ बातें
स्टेशन की उन घोषणाओं जैसी होती हैं
जो साफ़ सुनाई तो देती हैं,
मगर
हम फिर भी
उन्हें अपने मतलब के अनुसार ही समझते हैं।

No comments:

Post a Comment