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Monday, 8 June 2026

प्रेम की पुरातत्व-खुदाई

प्रेम की पुरातत्व-खुदाई

कहा गया है

कि इस धरती पर

कभी प्रेम नाम का एक जीव रहता था।

उसके पंख नहीं थे

फिर भी वह उड़ लेता था

सीमाओं के आर-पार।

उसकी कोई जात नहीं थी

फिर भी सब जातियों में जन्म ले लेता था।

पुरातत्व विभाग ने

हाल ही में एक खुदाई में

दो हथेलियाँ बरामद की हैं

जो सदियों बाद भी

एक-दूसरे को थामे हुए थीं।

विशेषज्ञों का कहना है

यह किसी विलुप्त प्रजाति का अवशेष हो सकता है।

उधर संसद में

इस पर बहस जारी है

कि प्रेम राष्ट्रीय विरासत है

या राष्ट्रीय खतरा।

इधर गाँव के बाहर

बरगद अब भी गवाही देता है

कि उसने देखा था

दो लोगों को

एक-दूसरे की आँखों में

भविष्य बोते हुए।

तभी से

बरगद के पत्तों पर

अफवाहें उगती हैं।

और प्रेम?

वह शायद

किसी संग्रहालय की टूटी अलमारी में

धूल खा रहा है

या किसी लड़की की डायरी में

अब भी साँस ले रहा है।

मुकेश ,,,,,,,,

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