“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
मैंने देखा है
कि जब विचार एक ही रंग में रंग दिए जाते हैं तो जीवन फीका नहीं पड़ता वह खतरनाक हो जाता है
क्योंकि वहाँ भिन्नता नहीं बचती सिर्फ़ सहमति का अभिनय बचता है
मुकेश ,,,,,,,,,,
No comments:
Post a Comment