“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
बरामदा
घर में सबसे उदास जगह
बरामदा होता है।
वह न भीतर का होता है,
न बाहर का।
शायद इसी कारण
वह सबसे ज़्यादा
इंतज़ार जानता है।
— मुकेश
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