आत्माओं के बीच का मौन
आत्माओं के बीच का मौन
अध्याय–१ : पहली शाम
हर प्रेम की शुरुआत "मैं तुमसे प्रेम करता हूँ" से नहीं होती।
कुछ प्रेम एक अनजानी-सी शांति से शुरू होते हैं।
वह उस शाम भीड़ में नहीं थी, फिर भी सबसे अलग दिखाई दे रही थी। उसके आसपास कोई विशेष आभा नहीं थी, कोई बनावटी आकर्षण नहीं। वह बस अपने होने में पूरी थी। जैसे किसी पुराने वृक्ष की छाया—जो किसी को बुलाती नहीं, फिर भी थका हुआ यात्री उसी के नीचे आकर बैठ जाता है।
मैंने उसे पहली बार देखा, तो ऐसा नहीं लगा कि मैं किसी नए व्यक्ति से मिल रहा हूँ। बल्कि ऐसा लगा जैसे बहुत समय पहले बिछड़ा हुआ कोई मौसम लौट आया हो। स्मृति ने उसे नहीं पहचाना, लेकिन हृदय ने बिना किसी परिचय के उसका स्वागत कर लिया।
हमारी नज़रें मिलीं।
एक क्षण...
फिर दोनों ने अपनी-अपनी आँखें दूसरी ओर फेर लीं।
लेकिन उस एक क्षण में कुछ ऐसा घट चुका था, जिसे शब्दों में बाँधना संभव नहीं था।
शायद आत्माएँ एक-दूसरे को पहचानने के लिए नाम नहीं पूछतीं।
उस शाम हम एक ही बरामदे में बैठे रहे। सामने आकाश में ढलता हुआ सूरज था। हवा में रातरानी की हल्की-सी सुगंध घुल रही थी। दूर किसी मंदिर से आती घंटियों की ध्वनि संध्या को और भी शांत बना रही थी।
उसने धीरे से पूछा,
"क्या आपको शामें भी अच्छी लगती हैं?"
मैं मुस्कुरा दिया।
"सुबह उम्मीद देती है... लेकिन शाम समझ देती है। इसलिए मुझे शामें प्रिय हैं।"
वह कुछ देर तक मुझे देखती रही। फिर उसके होंठों पर एक धीमी मुस्कान उतर आई। वह मुस्कान किसी उत्तर से अधिक एक स्वीकृति थी।
उस दिन हमने जीवन की कोई बड़ी बात नहीं की। न प्रेम की, न भविष्य की, न सपनों की।
हमने बादलों के आकार देखे।
हवा की दिशा महसूस की।
चाय के कपों से उठती भाप को देर तक निहारते रहे।
और यह पाया कि दो लोग बिना बहुत कुछ कहे भी एक-दूसरे के बहुत निकट आ सकते हैं।
सूरज डूब चुका था।
अँधेरा धीरे-धीरे धरती पर उतर रहा था।
वह उठी। जाते-जाते उसने एक बार पीछे मुड़कर देखा।
उसकी आँखों में कोई प्रश्न नहीं था।
लेकिन एक ऐसा आमंत्रण था, जो शब्दों के बिना भी सुनाई दे रहा था
"फिर मिलेंगे..."
मैंने कुछ नहीं कहा।
केवल सिर हिला दिया।
उस रात पहली बार मुझे लगा कि जीवन में कुछ मुलाक़ातें नियति लिखती है। वे किसी संयोग से नहीं होतीं। वे तब होती हैं, जब दो अधूरी नदियाँ एक ही सागर की ओर बह रही होती हैं।
और शायद...
हमारी कहानी उसी शाम से शुरू हो चुकी थी।
मुकेश ,,,,,,,,,
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