तुम्हारा इंतज़ार

 तुम्हारा इंतज़ार

इंतज़ार का भी अपना एक सौन्दर्य होता है। यह बात मुझे तुमसे मिलने के बाद समझ में आई। पहले लगता था कि प्रतीक्षा केवल समय को लंबा कर देती है। अब लगता है, प्रतीक्षा ही समय को अर्थ देती है।

जब तुम आने वाली होती हो, तो मैं घड़ी नहीं देखता। मैं धूप का रंग देखता हूँ, हवा की चाल देखता हूँ, पेड़ों की पत्तियों को देखता हूँ। जाने क्यों, तुम्हारे आने से पहले पूरी दुनिया में एक हल्की-सी तैयारी शुरू हो जाती है। जैसे मौसम भी जानता हो कि कोई ऐसा आने वाला है, जिसके आने से साधारण क्षण भी याद बन जाते हैं।

तुम्हारे आने का कोई निश्चित समय नहीं होता, लेकिन तुम्हारी आहट का एक अपना समय होता है। वह दिल को सबसे पहले सुनाई देती है। फिर आँखें दरवाज़े की ओर उठती हैं, और उसके बाद होंठों पर अनायास एक मुस्कान चली आती है। शायद यही प्रेम का सबसे सरल परिचय है—किसी के आने से पहले ही उसका असर महसूस होने लगे।

और जब तुम सामने होती हो, तब समझ में आता है कि प्रतीक्षा कभी व्यर्थ नहीं जाती। वह हमारे भीतर मिलने की क्षमता पैदा करती है। जो सहज मिल जाता है, उसका सुख क्षणिक होता है; लेकिन जिसका इंतज़ार किया गया हो, उसकी एक झलक भी देर तक मन में उजाला करती रहती है।

तुम्हें शायद कभी पता न चले कि मैंने तुम्हारा कितना इंतज़ार किया है। क्योंकि मैंने उसे कभी शिकायत की तरह नहीं जिया। मैंने उसे वैसे ही सँभालकर रखा, जैसे कोई माली फूल खिलने से पहले हर सुबह पौधे को पानी देता है। उसे मालूम होता है कि फूल अपने समय पर ही खिलेगा।

शायद प्रेम का सबसे सुंदर रूप मिलन नहीं, बल्कि वह विश्वास है कि कोई आएगा। और जब तक यह विश्वास जीवित रहता है, तब तक मन के भीतर एक खिड़की खुली रहती है, जहाँ से उम्मीद की धूप रोज़ चली आती है।

— मुकेश

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