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चिंतन — अध्याय–26 : सत्य क्या है? — भाग–4 : वेदान्त में सत्य

चिंतन — अध्याय –26 : सत्य क्या है ? — भाग –4 : वेदान्त में सत्य वेदों ने सत्य को ऋत के रूप में देखा , उपनिषदों ने उसे सत् और ब्रह्म के रूप में प्रतिष्ठित किया। किन्तु एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न अभी भी शेष था — यदि ब्रह्म ही सत्य है , तो यह जगत् क्या है ? हम जो संसार देखते हैं , उसका स्वरूप क्या है ? क्या वह भी उतना ही सत्य है जितना ब्रह्म ? या वह केवल आभास (Appearance) है ? इन्हीं प्रश्नों के उत्तर खोजते हुए वेदान्त की विभिन्न परम्पराओं का विकास हुआ। वेदान्त का मूल आधार एक ही है — उपनिषद् , भगवद्गीता और ब्रह्मसूत्र — किन्तु इन ग्रन्थों की व्याख्या के आधार पर अनेक दार्शनिक मत विकसित हुए। इस भाग में हम तीन प्रमुख वेदान्त परम्पराओं — अद्वैत , विशिष्टाद्वैत और द्वैत — के माध्यम से सत्य की अवधारणा का अध्ययन करेंगे। वेदान्त का आधार : सत्य की खोज " वेदान्त " का शाब्दिक अर्थ है — वेदों का अन्त , अर्थात् वेदों का दार्शनिक निष्कर्ष। वेदान्त का मूल ...