मन , के मानसरोवर में
मन ,
के मानसरोवर में
उतरोगी तो, तुम्हे
दो कबूतर
अनादि काल से बैठे मिलेंगे
गुटरगूँ - गुटरगूँ
करते मिलेंगे
जिसमे कि - एक तुम हो
एक मै हूँ
(देखो तुम हँसना नहीं - पर ये सच है - मेरी मैना
मेरी बुलबुल - मेरी गुतुंगरगूं )
मुकेश इलाहाबादी ------------------------------
के मानसरोवर में
उतरोगी तो, तुम्हे
दो कबूतर
अनादि काल से बैठे मिलेंगे
गुटरगूँ - गुटरगूँ
करते मिलेंगे
जिसमे कि - एक तुम हो
एक मै हूँ
(देखो तुम हँसना नहीं - पर ये सच है - मेरी मैना
मेरी बुलबुल - मेरी गुतुंगरगूं )
मुकेश इलाहाबादी ------------------------------
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