आग के शोलों पे चल के देखते हैं

आग के शोलों पे चल के देखते हैं
आओ, हम इश्क़ कर के देखते हैं

सुना है कि, दुनिया रंग बिरंगी है
आओ, हम तुम मिल के देखते हैं 

नंगी आँखों से तो देख ली,आओ 
दुनिया, चश्मा, पहन के देखते हैं

किसी ने कहा दुनिया इक मेला है
आओ हम तुम भी चल के देखते हैं

अब तक झूठ के पैरहन पहने,अब
सच की कमीज पहन के देखते हैं 

मुकेश इलाहाबादी -----------------

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