अब तो लब हमने सी लिए हैं अपने


अब तो लब हमने सी लिए हैं अपने
दर्द  तन्हाइयों से कह दिए हैं अपने

साँझ हो गयी है अब न आएगा वो
निराश, हम घर चल दिए है अपने

तीर तो हमारे भी तरकश में थे बस
युद्ध के भाव को तज दिए है अपने

मुकेश इलाहाबादी ------------------

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