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Saturday, 28 February 2026

तुम्हारी यादें बारिश की खुली खिड़कियाँ हैं

 तुम्हारी यादें बारिश की खुली खिड़कियाँ हैं


तुम्हारी यादें

बारिश की खुली खिड़कियाँ हैं

जहाँ से भीगती हुई हवा

सीधे दिल तक आती है।


जब बादल

बिना दस्तक दिए

आकाश पर छा जाते हैं,

वहीं से तुम्हारी आवाज़

बूँदों में घुलकर उतरती है।


खिड़की खुली रहती है

न पर्दा,

न रोक।

बस पानी की महीन लकीरें

और काँच पर फिसलती हुई

स्मृतियों की धुन।


तुम्हारी हँसी

जैसे टीन की छत पर

बरसती बारिश

एक साथ शोर भी,

एक साथ सुकून भी।


भीतर की सूखी दीवारें

धीरे-धीरे नम हो जाती हैं,

और मन की धूल

बहने लगती है।


कभी-कभी

मैं उस खिड़की के पास बैठा

हथेली बाहर कर देता हूँ

कि कुछ बूँदें

मेरे हिस्से भी आएँ।


तुम्हारी यादें

सिर्फ़ भीगना नहीं सिखातीं,

वे सिखाती हैं

भीगकर हल्का होना।


और जब बारिश थमती है,

खिड़की के चौखट पर

एक ताज़ी गंध रह जाती है

मिट्टी की,

नई शुरुआत की।


तुम्हारी यादें

बारिश की खुली खिड़कियाँ हैं

जिन्हें मैं

कभी बंद नहीं करता।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,

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