कम खूबसूरत लड़की,
आँखों में कहानियाँ लिए,
चुपचाप बैठी है,
जहाँ दुनिया की रौनक नहीं पहुँचती।
उसके भीतर तूफ़ान हैं,
शब्दों के बिना, दिल की गहराई में गूँजते।
हर मुस्कान के पीछे दर्द छुपा है,
हर हँसी के किनारे पर एक अनकहा सवाल।
वो अपनी आवाज़ को दबा लेती है,
क्योंकि लोग उसकी कहानी सुनना नहीं चाहते।
पर कभी-कभी, जब कोई उसकी आँखों में देखता है,
तो उसे महसूस होता है
उसकी आत्मा अभी भी चमक रही है।
कम खूबसूरत लड़की—तुम केवल रंग नहीं,
तुम वह कहानी हो, जो अपने दर्द से
धीरे-धीरे सशक्त बनकर सामने आती है।
मुकेश ,,,,,,
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