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Sunday, 3 May 2026

दिल में जो शोर है, वो सुनता नहीं है,

 दिल में जो शोर है, वो सुनता नहीं है,

ये कैसा सन्नाटा है, मिटता नहीं है।


तेरी याद का सिलसिला चल रहा है,

कोई वक़्त इसको भी रोकता नहीं है।


मेरी आँख में एक दरिया छुपा है,

मगर ये किसी से भी बहता नहीं है।


तेरी बेरुख़ी ने ये हाल कर दिया है,

कोई ज़ख़्म अब दिल में पलता नहीं है।


मैं लफ़्ज़ों में ढालूँ भी तो क्या लिखूँ मैं,

जो सच है वही मुझसे लिखता नहीं है।


ये तन्हा सा दिल अब थकन से भरा है,

मगर ख़ुद से मिलने को रुकता नहीं है।


'मुकेश' हाल-ए-दिल अब किसे मैं सुनाऊँ,

कोई अपना इस दर्द को समझता नहीं है


मुकेश ,,,,,,,,,

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