“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
स्मृति
समय ने पूछा
"क्या बचाकर रखा है?"
मैंने कहा
कुछ चेहरे,
कुछ आवाज़ें,
और कुछ ऐसे दिन,
जो उस समय
साधारण थे,
पर अब
अनमोल हैं।
— मुकेश
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