मुझे सिखाया गया
कि निशाना सिर्फ़ एक बिंदु होना चाहिए
बाक़ी सब धुंध है
पर मैं जब भी ध्यान लगाने बैठा
धुंध और गहरी हो गई
और मुझे दिखने लगा
कि लक्ष्य के पीछे
कितनी दुनिया छूट जाती है
पेड़
जिस पर वह चिड़िया बैठी है
हवा
जो उसे हिला रही है
और वह आँख
जिसे देखने के लिए
बाक़ी सब मिटाना पड़ता है
मुकेश ,,,,,,,,,,
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