घर में एक कमरा हमेशा खाली रहता है
हर घर में एक कमरा होता है
जो नक्शे में दिखाई नहीं देता।
उसमें न बिस्तर होता है,
न अलमारी,
न खिड़की।
फिर भी वह घर का सबसे बड़ा कमरा होता है।
वह उन लोगों से भरा रहता है
जो अब वहाँ नहीं हैं।
किसी की हँसी,
किसी की आवाज़,
किसी की डाँट,
किसी की आदत।
वे लोग चले जाते हैं,
लेकिन अपना थोड़ा-सा जीवन
उस कमरे में छोड़ जाते हैं।
कभी किसी गीत से उसका दरवाज़ा खुल जाता है।
कभी किसी पुराने बर्तन से।
कभी किसी भूले हुए नाम से।
और कभी बिना किसी कारण।
तब अचानक लगता है
कि अनुपस्थित लोग
पूरी तरह अनुपस्थित नहीं होते।
वे घरों में नहीं रहते,
स्मृतियों में रहते हैं।
और स्मृतियों के घर का किराया
समय भी नहीं वसूल पाता।
इसलिए जब अगली बार
आप अपने घर में अकेले हों,
तो ज़रा ध्यान से देखिएगा।
संभव है,
आप अकेले न हों।
कुछ लोग
अब भी वहीं रहते हों,
जहाँ से वे वर्षों पहले जा चुके हैं।
घर में सबसे ज़्यादा जगह दीवारें नहीं घेरतीं, यादें घेरती हैं।
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