“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
मैंने अपने प्रश्नों को
कई उत्तर दिए
कुछ किताबों से कुछ लोगों से कुछ अनुभवों से
मगर एक प्रश्न था जो हर उत्तर के बाद और बड़ा हो जाता था
जैसे वह जवाब नहीं चाहता था
वह सिर्फ मुझे थकते हुए देखना चाहता था।
मुकेश ,,,,,,,,,,
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