प्रेम की गुमशुदगी की रिपोर्ट
थाने में दर्ज है
एक पुरानी रपट।
गुमशुदा का नाम — प्रेम।
रंग — बदलता रहता है।
कद — दो धड़कनों के बीच जितना।
पहचान —
जहाँ दिखाई दे
वहीं से गायब हो जाता है।
आख़िरी बार
उसे देखा गया था
एक बूढ़ी स्त्री की आँखों में
जो चालीस बरस बाद भी
अपने मृत पति से बातें करती थी।
दरोगा ने कहा
"इतने साल हो गए,
अब तो इसे मृत मान लेना चाहिए।"
तभी
रपट के कोने पर बैठी
एक तितली हँस पड़ी।
और फ़ाइल से
अचानक
गुलमोहर की गन्ध आने लगी।
मुकेश ,,,,,,,,
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