“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
पासवर्ड
मेरे जाने के बाद
लोग मेरे फ़ोन के पासवर्ड खोजेंगे,
ईमेल खोलेंगे,
पुरानी फ़ाइलें देखेंगे।
पर जो सबसे ज़रूरी था
मैं किन बातों पर चुप रहा,
किन लोगों को याद करता रहा,
और किन्हें कभी भूल नहीं पाया,
उसका कोई पासवर्ड नहीं होगा।
मुकेश ,,,,,,,,,,
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