“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
वे कहते हैं
हम रक्षा कर रहे हैं
पर वे यह नहीं बताते कि किससे
कभी दुश्मन बाहर होता है कभी भीतर और कभी-कभी वह बस एक सुविधा बन जाता है जिससे हर सवाल का जवाब मिल जाए
मुकेश ,,,,,,,,,,
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