“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
प्रेम करो तो ऐसे
जैसे रेटिंग देना हो पाँच सितारे या कुछ भी नहीं
और बिछड़ो तो ऐसे जैसे “रिटर्न पॉलिसी” खत्म हो गई हो और अब कोई शिकायत दर्ज नहीं होगी
मुकेश ,,,,,,,,,,
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