“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
उत्तर
उम्र भर
मैं उत्तर खोजता रहा।
क्यों हुआ?
कैसे हुआ?
किसलिए हुआ?
अब लगता है,
जीवन का सौन्दर्य
उत्तर मिलने में नहीं,
कुछ प्रश्नों के साथ
शांत हो जाने में है।
मुकेश ,,,,,,,,,,
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