हमने चीज़ें बचाईं, समय नहीं
हमने पुराने सिक्के बचाकर रखे।
पुरानी घड़ियाँ बचाकर रखीं।
पुरानी तस्वीरें बचाकर रखीं।
पुरानी किताबें, पुराने बर्तन, पुराने फ़र्नीचर तक बचाकर रखे।
लेकिन एक चीज़ थी
जो हर दिन हमारे हाथों से फिसलती रही—
समय।
हम सोचते रहे कि
कभी फुर्सत मिलेगी तो बैठेंगे,
कभी समय मिलेगा तो मिलेंगे,
कभी अवसर मिलेगा तो कहेंगे कि
"तुम मेरे लिए कितने महत्वपूर्ण हो।"
लेकिन समय
कभी लौटकर नहीं आया।
और जिन लोगों से यह सब कहना था,
वे भी हमेशा नहीं रहे।
जीवन की सबसे बड़ी विडम्बना शायद यही है कि
हम जिन चीज़ों को बचाने में लगे रहते हैं,
वे अक्सर कम महत्वपूर्ण होती हैं।
और जो सबसे अधिक मूल्यवान होता है,
उसे हम अनंत समझकर टालते रहते हैं।
एक दिन अचानक पता चलता है
अलमारी में सब कुछ सुरक्षित है,
लेकिन जिनके साथ बैठकर उसे देखना था,
वे कहीं और चले गए हैं।
जीवन में सबसे दुर्लभ वस्तु पैसा नहीं, समय है।
और सबसे बड़ा सौभाग्य वह व्यक्ति है जिसे आप अपना समय दे सकें।
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