“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
पहाड़ की चोटी पर पहुँचकर
उसने पीछे देखा।
रास्ता बहुत लंबा था।
संघर्ष भी।
सफलता भी।
बस एक कमी थी
जिसे यह सब दिखाना था,
वह बीच रास्ते में ही
कहीं छूट गया था।
मुकेश ,,,,,,,,,,
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