“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
बारिश
बारिश हर साल आती है।
बदलते हैं तो सिर्फ़ लोग।
किसी उम्र में
हम उसमें भीगते हैं,
खिड़की से देखते हैं।
— मुकेश
No comments:
Post a Comment