तना
पेड़ का तना कभी ध्यान नहीं खींचता।
लोग फूलों की बात करते हैं, फलों की प्रशंसा करते हैं, पत्तियों की हरियाली देखते हैं। लेकिन तना चुपचाप खड़ा रहता है—न प्रदर्शन, न शिकायत।
वर्षों की धूप, बारिश, आँधियाँ और ऋतुएँ उसकी देह पर दर्ज होती रहती हैं। वह हर मौसम को अपने भीतर समेट लेता है, पर उसके बारे में बोलता नहीं।
शायद जीवन में कुछ लोग भी तनों की तरह होते हैं।
वे केंद्र में दिखाई नहीं देते, लेकिन पूरा संसार उन्हीं के सहारे खड़ा रहता है।
उन्हें पहचान कम मिलती है, भरोसा ज़्यादा।
उन्हें प्रशंसा कम मिलती है, ज़िम्मेदारियाँ ज़्यादा।
तने को देखते हुए लगता है कि शक्ति का सबसे परिपक्व रूप शोर नहीं करता।
वह बस खड़ा रहता है।
और अपने खड़े रहने से बहुत-सी चीज़ों को गिरने से बचा लेता है।
मुकेश ,,,,,,,,,
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