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Tuesday, 2 June 2026

एक दिन आख़िरी बार

 एक दिन आख़िरी बार

एक दिन
हम किसी से
आख़िरी बार मिले थे।

न कोई संकेत था,
न कोई विदाई।

वह दिन
बाक़ी दिनों जैसा ही था।

बहुत बाद में समझ आया—

कुछ लोग जाते नहीं,

वे बस

एक दिन

लौटना बंद कर देते हैं।

मुकेश

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