“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
दरवाज़ा
कुछ दरवाज़े
लकड़ी के नहीं होते।
वे लोगों के भीतर होते हैं।
खटखटाओ तो खुल जाते हैं,
अनदेखा करो तो
हमेशा के लिए बंद।
— मुकेश
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