“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
सवाल
न इतनी ख़ुशी मिली कि उसे याद रखता,
न इतना दुःख कि उसे भूल न पाता।
ज़िंदगी,
तुम आखिर थीं क्या—
एक घटना या बस एक गुज़रता हुआ मौसम?
मुकेश ,,,,,,,,,,
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