“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
कभी-कभी लगता है
सही दिशा पाने की दौड़ में हम दिशा को ही खो देते हैं
जैसे किसी नदी को कहा जाए कि वह सिर्फ़ समुद्र देखे
और रास्ते में बहते हुए अपने किनारों को भूल जाए
मुकेश ,,,,,,,,,,
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