“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
बोलो तो ऐसे जैसे विज्ञापन में शब्द बोले जाते हैं मुस्कुराओ तो ठीक उसी एंगल से जिससे कैमरा तुम्हें पसंद करे
चुप रहो तो ट्रेंडिंग चुप्पी की तरह जिसे लोग शेयर कर सकें बिना समझे
मुकेश ,,,,,,,,,,
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