“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
शायद देशभक्ति
किसी पर अधिकार जमाने का नाम नहीं
शायद वह हर उस आवाज़ को जगह देने का साहस है जो असहमत होते हुए भी देश से बाहर नहीं जाती
क्योंकि देश किसी विचार का नहीं सभी विचारों के टकराव का नाम है
मुकेश ,,,,,,,,,,
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