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Tuesday, 2 June 2026

घर लौटना

 घर लौटना

उम्र के एक पड़ाव पर

सफ़र ख़त्म नहीं होते,

बस बदल जाते हैं।

फिर आदमी

दुनिया देखने नहीं,

अपने भीतर लौटने निकलता है।

मुकेश

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