वो मशरूफ हैं इतने ज़माने की ग़ज़ल सुनने मे


वो मशरूफ हैं इतने ज़माने की ग़ज़ल सुनने मे
सुनाई क्या देगी उन्हें हमारे दिल की धड़कने !!
 मुकेश इलाहाबादी --------------------------

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