टप्पा खाता रहा उसके हाथ आता रहा
टप्पा खाता रहा उसके हाथ आता रहा
हर बार वह मुझे गेंद सा उछालता रहा
टूटते हुए काँच की खनक उसे पसंद थी
मेरे दिल के टुकड़े कर कर फेंकता रहा
उसकी हर अदा पसंद आयी ये और बात
दिले खिलौना वो तोड़ता, मै जोड़ता रहा
मुकेश इलाहाबादी -------------------------
Comments
Post a Comment