तेरे बारे में सोचते सोचते

तेरे बारे में सोचते सोचते
फिर सो जाऊँगा रोते रोते

उठता नहीं  बोझ फिर भी 
चलूँगा तेरी यादें ढोते ढोते

मुकेश इलाहाबादी -------

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