एक दिन मैंने पाया
कि मैं किसी और को याद नहीं कर रहा
मैं बस अपने उस रूप को याद कर रहा हूँ
जो कभी पूरा नहीं हुआ
जिसने सपने तो देखे
मगर उन्हें जीने की जगह
उन्हें लिख देना चुना
और अब वही शब्द
मेरे सामने खड़े हैं
जैसे पुराने मित्र
जो पहचानते तो हैं
मगर पास नहीं आते।
मुकेश ,,,,,,,,,,
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